⚖️ हत्या के प्रयास एवं अवैध हथियार से फायरिंग प्रकरण में न्यायालय का कठोर फैसला — आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा

▶️ भूमि विवाद में सीने पर गोली मारकर हत्या का प्रयास करने वाले आरोपी को माननीय विशेष न्यायालय ने सुनाई सजा।

▶️ सुदृढ़ विवेचना एवं प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के आधार पर आरोपी दोषसिद्ध, अर्थदंड से भी किया गया दंडित।

थाना कोतवाली आगर में वर्ष 2018 में पंजीबद्ध हत्या के प्रयास के बहुचर्चित प्रकरण में जिला पुलिस आगर मालवा को महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। माननीय विशेष न्यायालय, आगर के माननीय विशेष न्यायाधीश श्री मधुसूदन जंघेल द्वारा दिनांक 07 अगस्त 2026 को प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए आरोपी सचिन पुरी को दोषसिद्ध कर 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹3,500 के अर्थदंड से दंडित किया गया। आरोपी को धारा 307 भारतीय दंड संहिता एवं धारा 25(1-B) आयुध अधिनियम के अंतर्गत दोषी ठहराया गया।

प्रकरण का संक्षिप्त विवरण –

दिनांक 04 जुलाई 2018 को फरियादी अपने भाई के साथ खेत से मोटरसाइकिल द्वारा वापस आगर लौट रहा था। कोटा-इंदौर मार्ग स्थित बर्डा-बरखेड़ा जोड़ के समीप आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर रास्ता रोक लिया। भूमि विवाद एवं पारिवारिक रंजिश के चलते आरोपी ने जान से मारने की नीयत से अवैध पिस्टल से लगातार फायर किए, जिनमें से गोली फरियादी के भाई के सीने में लगी। घायल को तत्काल उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली आगर में अपराध क्रमांक 360/2018 धारा 341, 294, 307, 120-बी, 34 भादवि एवं संबंधित धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।

सुदृढ़ विवेचना से मिली दोषसिद्धि

प्रकरण की विवेचना तत्कालीन उप निरीक्षक रामचंद्र नागर द्वारा वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष तरीके से करते हुए आवश्यक मौखिक, दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में सुदृढ़ अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा और न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषसिद्ध कर कठोर दंड से दंडित किया गया।

सराहनीय भूमिका –

प्रकरण में शासन की ओर से एजीपी अशोक गवली द्वारा प्रभावी एवं सशक्त न्यायालयीन पैरवी की गई। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों, गवाहों एवं विवेचना के दौरान संकलित दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य प्रमाणों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी के विरुद्ध आरोप संदेह से परे सिद्ध हुए।

प्रकरण में दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने में विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक रामचंद्र नागर, कोर्ट मुंशी आरक्षक जितेंद्र राजपूत एवं कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक महेश परमार की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उनके द्वारा न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान प्रभावी समन्वय, अभिलेखों के समयबद्ध प्रस्तुतिकरण एवं साक्ष्यों के सुव्यवस्थित अनुसरण से अभियोजन पक्ष को सफलता प्राप्त हुई।

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