कोतवाली आगर के बहुचर्चित कृष्णपाल हत्याकांड में न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला — सभी 08 आरोपियों को आजीवन कारावास
▶️ पुरानी रंजिश में युवक का अपहरण कर निर्मम हत्या करने वाले सभी 08 आरोपियों को न्यायालय ने दोषी ठहराया।
▶️ प्रत्येक आरोपी को आजीवन कारावास एवं ₹4,000-₹4,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया।
थाना कोतवाली आगर के अपराध क्रमांक 165/2024, धारा 302, 365, 506, 34 भारतीय दण्ड संहिता के बहुचर्चित कृष्णपाल हत्याकांड में जिला पुलिस आगर मालवा की सुदृढ़ एवं वैज्ञानिक विवेचना के आधार पर माननीय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, आगर श्री मधुसूदन जंघेल द्वारा दिनांक 24 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया गया। न्यायालय ने प्रकरण में सभी 08 आरोपियों को दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास एवं ₹4,000-₹4,000 के अर्थदंड से दंडित किया है।
घटना दिनांक 05 मई 2024 की है, जब फरियादी फरमान खां निवासी अर्जुन नगर, आगर ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने साथियों के साथ जयश्री अस्पताल के पीछे स्थित मैदान में बैठा था। इसी दौरान दो कारों में सवार आरोपी पुरानी रंजिश के चलते कृष्णपाल सौंधिया के साथ हॉकी एवं डंडों से बेरहमीपूर्वक मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने पर फरियादी को भी जान से मारने की धमकी दी गई तथा आरोपियों द्वारा कृष्णपाल का जबरन अपहरण कर विभिन्न स्थानों पर ले जाया गया। बाद में मालीखेड़ी रोड स्थित नाग मंदिर के समीप कृष्णपाल गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उपचार के लिए उज्जैन ले जाते समय रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई।
प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अनिल मालवीय द्वारा वैज्ञानिक, निष्पक्ष एवं तथ्यपरक विवेचना करते हुए सभी आरोपियों को चरणबद्ध तरीके से गिरफ्तार किया गया तथा पर्याप्त मौखिक, दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। प्रभावी विवेचना एवं सशक्त साक्ष्यों के आधार पर माननीय न्यायालय ने आरोपी धारासिंह, बनेसिंह, दिनेश, राहुल, मेहरबानसिंह, दरबारसिंह, दशरथ सिंह एवं भारत को दोषी ठहराते हुए कठोर दंड से दंडित किया।
न्यायालयीन पैरवी एवं पुलिस टीम का सराहनीय योगदान
प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक (AGP) श्री अशोक गवली द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक महेश परमार, वारंट मुंशी आरक्षक लखन राठौर, कोर्ट मुंशी जितेंद्र राजपूत, विवेचना अधिकारी निरीक्षक अनिल मालवीय तथा गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित कराने में प्रधान आरक्षक सुनील पटेल की विशेष एवं सराहनीय भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों एवं प्रभावी न्यायालयीन कार्रवाई के परिणामस्वरूप अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा और दोषियों को कठोर दंड दिलाया जा सका।
गंभीर अपराधों में त्वरित विवेचना, सुदृढ़ साक्ष्य संकलन एवं प्रभावी न्यायालयीन समन्वय के माध्यम से अपराधियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आमजन की सुरक्षा एवं न्याय सुनिश्चित करने के लिए जिला पुलिस निरंतर प्रतिबद्ध है।





