सायबर सेल आगर मालवा की त्वरित कार्रवाई से साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत

▶️ वर्ष 2026 (माह जून तक) प्राप्त 200 से अधिक साइबर शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई, लगभग ₹38.10 लाख की राशि होल्ड कराई गई।

▶️ न्यायालयीन प्रक्रिया एवं MRM पोर्टल के माध्यम से ₹8.50 लाख से अधिक राशि साइबर ठगी के पीड़ितों के खातों में वापस कराई गई।

पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश भोपाल के निर्देशन में प्रदेशभर में साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई एवं साइबर ठगी के पीड़ितों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रभावी कार्यवाही निरंतर की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रविन्द्र कुमार बोयट के मार्गदर्शन में जिला सायबर सेल आगर मालवा द्वारा वर्ष 2026 (माह जून तक) साइबर अपराधों के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता अर्जित करते हुए पीड़ितों को आर्थिक राहत प्रदान की गई है।

वर्ष 2026 (माह जून तक) नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से प्राप्त 200 से अधिक साइबर शिकायतों पर त्वरित तकनीकी विश्लेषण एवं कार्रवाई करते हुए लगभग ₹1 करोड़ 24 लाख की संदिग्ध धोखाधड़ी राशि का परीक्षण किया गया। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित बैंकों, पेमेंट गेटवे, वित्तीय संस्थानों एवं अन्य एजेंसियों से तत्काल समन्वय स्थापित कर लगभग ₹38 लाख 10 हजार की राशि पर सफलतापूर्वक होल्ड/लीन लगवाया गया, जिससे बड़ी मात्रा में पीड़ितों की राशि सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त हुई।

सायबर सेल द्वारा प्रत्येक प्रकरण में बैंकिंग संस्थाओं, विवेचना अधिकारियों एवं माननीय न्यायालय के समक्ष आवश्यक दस्तावेज समयबद्ध रूप से प्रस्तुत किए गए। इसके परिणामस्वरूप न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से अब तक ₹7,08,340/- की राशि साइबर ठगी के पीड़ितों के बैंक खातों में वापस कराई जा चुकी है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार के Money Restoration Module (MRM) के माध्यम से विधिक एवं तकनीकी प्रक्रिया पूर्ण कर ₹1,42,000/- की अतिरिक्त राशि भी पीड़ितों को वापस दिलाई गई। इस प्रकार अब तक कुल ₹8,50,340/- की राशि साइबर ठगी के पीड़ितों को वापस कर आर्थिक राहत प्रदान की जा चुकी है।

पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी ने बताया कि साइबर अपराधों में त्वरित कार्रवाई ही सफलता की कुंजी है। इसी उद्देश्य से जिले के सभी थाना स्तर पर पदस्थ आरक्षकों एवं संबंधित पुलिस अधिकारियों को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के संचालन एवं साइबर फ्रॉड शिकायतों के त्वरित पंजीयन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें शिकायत प्राप्त होते ही ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर आवश्यक तकनीकी एवं विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर संबंधित बैंकों के माध्यम से धोखाधड़ी की राशि पर तत्काल होल्ड/लीन लगाने की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया है। इसके परिणामस्वरूप अब साइबर ठगी की शिकायतों का प्रारंभिक निराकरण सीधे थाना स्तर पर ही अधिक प्रभावी एवं त्वरित रूप से किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों की राशि सुरक्षित रखने एवं वापस दिलाने की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिला पुलिस केवल साइबर अपराधों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम पर भी समान रूप से कार्य कर रही है। SAFE CLICK-2.0 सहित विभिन्न साइबर जागरूकता अभियानों के माध्यम से विद्यालयों, महाविद्यालयों, बैंकों, शासकीय कार्यालयों, ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों एवं सार्वजनिक स्थलों पर निरंतर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड, KYC अपडेट फ्रॉड, OTP एवं UPI फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, फर्जी लिंक, QR Code स्कैम एवं अन्य साइबर अपराधों से बचाव के व्यवहारिक उपाय बताए जा रहे हैं।

सायबर टीम की सराहनीय भूमिका
जिला सायबर सेल की इस प्रभावी कार्यवाही एवं पीड़ितों को त्वरित आर्थिक राहत दिलाने में उप निरीक्षक राखी गुर्जर, प्रधान आरक्षक सुब्रतो शर्मा, प्रधान आरक्षक वीरेंद्र सिंह एवं आरक्षक रवि दोहरे की विशेष एवं सराहनीय भूमिका रही। टीम द्वारा त्वरित तकनीकी विश्लेषण, बैंकों एवं संबंधित एजेंसियों से सतत समन्वय तथा न्यायालयीन प्रक्रिया के प्रभावी अनुसरण के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पीड़ितों की राशि सुरक्षित रखने एवं वापस दिलाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई।

जिला पुलिस आगर मालवानागरिकों से अपील करती है कि किसी भी अज्ञात कॉल, संदिग्ध लिंक, मोबाइल एप, निवेश योजना, KYC अपडेट संदेश अथवा OTP संबंधी कॉल पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। किसी भी परिस्थिति में बैंक खाता, ATM, UPI PIN, CVV, OTP अथवा अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

“सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधों के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।”

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