⚖️ नातरा प्रथा, झगड़ा प्रथा एवं सामाजिक कुरीतियों के कानूनी पहलुओं पर नवीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय आगर में विशेष शोध कार्यक्रम आयोजित
▶️ पुलिस मुख्यालय भोपाल एवं नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली की शोध टीम ने किया अध्ययन एवं जानकारी का संकलन
▶️ पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी ने सामाजिक कुरीतियों के कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं को समझने और जागरूकता बढ़ाने पर दिया जोर
▶️ पुलिस अधिकारियों, अनुसंधानकर्ताओं एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने की सहभागिता
आगर-मालवा। नातरा प्रथा, झगड़ा प्रथा एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों से जुड़े कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं का व्यवस्थित अध्ययन करने तथा इनसे संबंधित आवश्यक जानकारी संकलित करने के उद्देश्य से दिनांक 13 अक्टूबर 2026 को नवीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय, आगर-मालवा में विशेष शोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस मुख्यालय (PHQ), भोपाल एवं नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली की शोध टीम की सहभागिता से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन सामाजिक प्रथाओं की प्रकृति, उनसे जुड़े सामाजिक प्रभावों तथा वर्तमान कानूनी प्रावधानों के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी एकत्रित करना था, ताकि विषय का व्यापक अध्ययन किया जा सके और भविष्य में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता तथा सामाजिक सुधार की दिशा में उपयोगी निष्कर्ष प्राप्त किए जा सकें।
🔹 पुलिस अधीक्षक ने सामाजिक कुरीतियों के प्रति संवेदनशील एवं विधिसम्मत दृष्टिकोण पर दिया जोर
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी ने सामाजिक कुरीतियों से जुड़े मामलों में कानून की जानकारी, सामाजिक परिस्थितियों की समझ तथा संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही किए जाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध घटित होने के बाद वैधानिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पीड़ितों को उचित सहायता उपलब्ध कराना तथा सामाजिक समस्याओं से जुड़े मामलों में निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने इस प्रकार के शोध कार्यक्रमों को पुलिस की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी बताते हुए कहा कि सामाजिक प्रथाओं से जुड़े मामलों में तथ्यों, कानूनी प्रावधानों एवं स्थानीय परिस्थितियों का समुचित अध्ययन आवश्यक है। शोध से प्राप्त जानकारी के आधार पर संबंधित विषयों को बेहतर ढंग से समझने तथा कानून के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने में सहायता मिल सकती है।
🔹 PHQ भोपाल एवं नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली की टीम ने किया अध्ययन
शोध कार्यक्रम में मोहित सोने (रिसर्च एसोसिएट, परिमल), हिमांशी यादव, समृद्धि सक्सेना एवं विनीत त्यागी (शोधकर्ता, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली) तथा ऋषि शुक्ला (आरक्षक, पीएसओ कार्यालय, पुलिस मुख्यालय भोपाल) शामिल रहे।
शोध टीम ने नातरा प्रथा, झगड़ा प्रथा एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी संकलित की। कार्यक्रम के दौरान इन प्रथाओं से जुड़े कानूनी प्रश्नों, सामाजिक परिस्थितियों तथा पुलिस की भूमिका को समझने पर विशेष ध्यान दिया गया। संकलित जानकारी शोध एवं अध्ययन के उद्देश्य से उपयोगी रहेगी।
🔹 पुलिस अधिकारियों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की रही सहभागिता
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार बोयट, थाना प्रभारी कोतवाली नागेश यादव, महिला थाना प्रभारी प्रहलाद सिंह, थाना प्रभारी बड़ौद रूपसिंह बैस, एवं थाना प्रभारी कानड़ राजकुमार दांगी सहित जिले के पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी सहभागिता की।
पुलिस एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सहभागिता से सामाजिक स्तर पर सामने आने वाली परिस्थितियों तथा संबंधित विषयों की व्यावहारिक जानकारी को समझने का अवसर मिला।
🔹 शोध का उद्देश्य—कानूनी समझ, जनजागरूकता एवं सामाजिक सुधार
नातरा प्रथा, झगड़ा प्रथा एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों से संबंधित विषयों का अध्ययन सामाजिक परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के बीच बेहतर समझ विकसित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे शोध कार्यक्रमों से संबंधित विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी संकलित करने, पुलिस की भूमिका को समझने तथा भविष्य में जनजागरूकता एवं विधिसम्मत कार्रवाई के लिए उपयोगी आधार तैयार करने में सहायता मिल सकती है।
पुलिस मुख्यालय भोपाल एवं नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली की सहभागिता से आयोजित यह शोध कार्यक्रम सामाजिक कुरीतियों के कानूनी पहलुओं को समझने, पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक संवेदनशील बनाने तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।





